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महर्षि श्री अरविन्द ने जो भविष्यवाणी की है वह सभी भविष्यवाणियों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। श्री अरविन्द के अनुसार – “सन् 24 नवम्बर 1926 को श्रीकृष्ण का पृथ्वी पर अवतरण होगा। मानवरूप में अवतरित वह परमसत्य अपने त्वरित क्रमिक विकास के साथ 1993 के अन्त तक सम्पूर्ण विश्व के सामने प्रकट हो जावेगा”।
श्री कृष्ण अतिमानसिक प्रकाश नहीं है। श्री कृष्ण के अतरण का अर्थ है अधिमानसिक देव का अवतरण जो जगत को अतिमानस और आनन्द के लिए तैयार करता है। श्रीकृष्ण आनन्दमय है। वे अतिमानस को अपने आनन्द की ओर उद्बुद्ध करके विकास का समर्थन और संचालन करते हैं।’
महर्षि अरविन्द की भविष्यवाणी है पश्चिम ने भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में सही दिशा में जितनी उन्नति करनी थी, कर ली। अब इससे आगे भारत अध्यात्म विज्ञान के क्षेत्र में उन्नति करेगा।
भौतिक विज्ञान कुछ समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा है और कुछ रोग भी असाध्य है। अध्यात्म विज्ञान में कुण्डलिनी शक्ति के सामने कोई रोग असाध्य नहीं।

भविष्यवाणियां हैं:-
नया विश्व का निर्माण (New Creation of world)
आत्माओं का नया संसार- (New Spiritual world)
आगामी मानव जाति दिव्य शरीर धारण करेगी।
                                                                                                                   – महर्षि अरविन्द