Gayatri mantra

“ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर् वरेण्यम्।
भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्।।
”यानी उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें।
वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।
“इस सनातन धर्म के सर्वश्रेष्ठ वेद मंत्र को नियमित जपने से अन्दर उत्साह और सकारात्मकता आती है, त्वचा की चमक बढ़ती है, तामसिकता से घृणा होती है, परमार्थ में रूची जागती है, भविष्य का पूर्वाभास होने लगता है, नेत्रों में तेज आता है, क्रोध शान्त होता है, ज्ञान में वृद्धि होती है।
इस संस्था द्वारा गायत्री यज्ञों के आयोजन का उद्देश्य प्रकृति की रक्षा एवं विश्व मानव कल्याण।